आप विचार विमर्श करे,विवेचना करे,समीक्षा कर,किंतु तर्क की भाषा मे सम्मान और सहजता दिखनी चाहिए।आप को सुगरकोट बात नही करनी है जो बहोत ही नाटकीय ढंग लगेगा।आप अपनी स्वाभाविक स्वतंत्रता को बरकरार रखे,पर सम्मानित सहजता प्रदान करते मंत्रणा करे,अपनी राय रखे।
अगर गुण है कोई अच्छाइ है तो सराहना आवश्यक है।तारीफ भी जम कर करे।व्यक्ति विशेष के समूहों मैं आप निखर कर आगे आना चाहते हो तो निडरतापूर्वक अपने विचार रखे।