गुजारिश आपसे हैं।
एक चालक ज़िन्दगी ने उम्र छीन ली
जुगनू सारे आज रोशनी के मोहताज फिरसे है
इस सफर का सिलसिला बड़ा लंबा रहा
कुछ मंज़िलें उम्र भर सफर मैं ही रह गई
न आरज़ू थी तेरी कभी न जुत्तशजु रही
फिरभी इन्तज़ार का सिलसिला चलता चला गया
एक लम्हा हर बार रोके निकला है
तलब का मंजर खोके निकला है
रुकी हुई सी भीड़ हर गली चौराहो पर
नजरअंदाज करने की वजह ढूढ़ता रह गया
ना भीड़ की वजह बन कभी
नज़रों के अहसास जहाँ थमते देख
पन्नों पर अल्फ़ाज़ वही रुकते देख