Saturday, 18 April 2020

अब चुप रहना है

                      बख़्श भी दो  

जूठ को पर ना लगाओ सियासत के
की मन की चादर विषैली  मैली भाति नहीं।

जो घर मे थे वह शाम तक खबरों को रंग दे चूके
जो घर जाने की होड़ में थे वह दौड़ ही नही पाए।

जदोजहद कुछ हमारी भी कम नही थी 
पहुँचना था आपके  जहन मन तक।

पहुंचा देना खबर हमारे गाँव तक
 की  हम बस आते है।